शनिवार, 6 जून 2015

आप और कांग्रेस पार्टियां केवल राजनीती कर रही हैं जिसमें राष्ट्रीयता शुन्य के बराबर है AAP and Congress are doing only politics which is devoid of nationalism

मोदी ने एक साल में इतनी तेज़ी से बदलाव लाया है की विरोधियों को हर तरफ से तीखी वाली मिर्ची लग रही है ....एक तरफ केजरीवाल बोलता है की वो नजीब जंग के द्वारा बदला ले रहा है और अब राज बब्बर बोलता है की वे प्रधानमंत्री नहीं परिधानमंत्री हैं .....मैंने एक बारी तो सोचा छोडो क्या करना ऐसे लोगों का ...लेकिन फिर मन में ख्याल आया जार देखू तो इनकी बातों में कितना दम है .......पहले केजरीवाल को ले लेते हैं ...इनका आरोप है की मोदी दिल्ली की हार का बदला ले रहे हैं ...चलो मान लिया की मोदी दिल्ली की हार का बदल ले रहे हैं ....लेकिन ये तो बताओ मोदी राज में ही दिल्ली पुलिस इतने अच्छे से काम क्यों कर रही है ....इस बार बाइक वालों का हुड़दंग कितनी सफलता से रोक गया ....वरना वही शीला दीक्षित की सरकार के समय दिल्ली पोलिस असहाय नज़र आती थी ....और तो और केंद्र सरकार द्वारा बिजली उत्पादन बढ़ाये जाने का क्रेडिट आप को लेते हुए शर्म भी नहीं आती बेशरम केजरीवाल ......केजरीवाल को लगता है की अगले चुनाव २०१९ में उनकी पार्टी ४०० सीट जीतकर पार्लियामेंट आएगी और फिर पुरे देश पर शाशन कर लेगी ....लेकिन मेरे प्यारे केजरीवाल दिल्ली की जनता को बेवकूफ तो बना लिया लेकिन देश की जनता उससे भी ज्यादा समझदार है ....वो यह समझती है की उसका हित अनहित क्या है ....भाजपा के १५ साल गुजरात में , छत्तीसगढ़ में १० साल , मध्य प्रदेश में १५ साल में सुशाशन देकर नाम कमाया है ....लेकिन आपका कोई ट्रैक रिकॉर्ड तो है नहीं ...तो इसलिए बयानबाज़ी से बेहतर है काम करिये ...क्यूंकि पांच साल के बाद जनता आपकी नौटंकी नहीं देखेगी बल्कि आपको आपके काम के हिसाब से नंबर मिलेंगे

और राज बब्बर साहब से भी मैं यही कहना चाहूंगा की मोदी जी की नक़ल करना बंद करे ....आज के समय में जब आप के पास देश हित से जुड़ने के लिए सामान्य ज्ञान का आभाव है उसीके वजह से आप जैसे नेता ऐसी बयां बाज़ी करते हैं ....मुझे आजतक यह नहीं समझ आया की जब मोदी जी यह बोल चुके हैं की किसानो की हित से जुडी हुई कोई भी बात को सशोधन करने में BJP सरकार पीछे नहीं हटेगी तो फिर आपको भूमि अधिग्रहण कानून से इतनी समस्या क्यों है .....आपको केवल राजनीति नहीं करनी चाहिए ....राष्ट्रनीति भी अपनानी चाहिए ......जो राजनीती राष्ट्र हित से अलग हो वह राजनीति नहीं हैं बल्कि वह देश द्रोह नीति है जिससे ना तो जनता का भला होगा और न ही आपका .....लेकिन कांग्रेस समान भैंस के सामने बीन बजने से कोई फायदा नहीं क्यूंकि जो लोग सत्ता को नहीं पचा पाये वो आज की तारिख में हार को भी पचा नहीं पा रहे हैं ...और जिनके पास सत्ता आ गयी (केजरीवाल) वो यह नहीं समझ पा रहे हैं विरोध की राजनीती से आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते .....झूठ बोलकर , फरेब करके आप सत्ता के सिखर पर तो पहुँच सकते हैं ....लेकिन अंत में जब यह सब जनता के सामने आता है और जनता शक्तिमान बनती है तो फिर आपका भी हाल गद्दाफी और होस्नी मुबारक जैसा होना तय है ....

अंततः मैं यह भी कहना चाहूंगा की भारत की जनता काफी समझदार और बुध्दिमान है जो कानून को अपने हाथ में लेना उचित नहीं समझती है ....नहीं तो सोचिये जरा अगर अन्ना आंदोलन के दौरान जनता उग्र हो कर संसद पर हमला कर देती ....या फिर बाबा रामदेव के 2014 आंदोलन के दौरान पंद्रह अगस्त के कार्यक्रम को नहीं होने देती ....लेकिन ऐसा सब नहीं हुआ क्यूंकि भारत की जनता की आशा आकांक्षाएं सब भारत के संविधान में सन्निहित हैं और जनता देखकर प्रयोग कर समझना चाहती है अब मेरा भला कैसे होगा ....और अगले दस सालों तक जनता यह प्रयोग करती रहेगी ...जैसे की हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड और दिल्ली के चुनावों में हुआ यह सब जनता के प्रयोग हैं ...और जब जनता यह सुनिश्चित कर लेगी तो फिर सब देश द्रोहियो के चहरे से नकाब उठ जायेगा ....
हमें तो बस यही शेर याद आता है ...
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है
वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है ....
jay hind
jay bharat 

बुधवार, 12 नवंबर 2014

ऊद्धव ठाकरे की नौटंकी Drama King Udhdhav Thakre in Maharashtra

उद्धव की नौटंकी
अब हम इसे नौटंकी नहींकहेंगे तो क्या कहेंगे......महाराष्ट्र विधान सभाचुनाव २०१४ के पहले शिवसेना के मुखिया ने जिस तरह से बीजेपी से सीटों के बँटवारे लिए लड़े वो जग जाहिर है और चुनाव के बाद मोदी लहर पर सवार होकर लगभग ६० सीटें जीतकर ऐसे उछलने लगे जैसे की महाराष्ट्र की बपौती उन्ही के पास है ....मराठी मानुष की राजनीति करने वाले यह भूल गए की मुंबई के बाहर भी महाराष्ट्र की ऐसी भी जनता है जिसे इन सब बातों की परवाह नहीं , वह गरीब इसलिए है उसके पास खेती के साधन नहीं है , और अगर हैं भी तो उसकी फसल का कोई खरीदार नहीं .,,जिसके कारण वह अक्सर बिचौलियों के चंगुल में फंस जाता है और उसे गरीबी और कर्ज के चलते उसे अपनी जान तक से हाँथ धोना पड़ता है ...बीजेपी ने उद्धव की कोई शर्त न मानकर बहुत अच्छा ही किया...क्यूंकि अगर सुशाशन अगर देना है तो गठबंधन की राजनीति से ऊपर उठना पड़ेगा ....और बीजेपी ठीक वैसा ही कर रही है.....आईये पहले महाराष्ट्र के घटनाक्रमपर नज़र डाले और देखें वोटबैंक की राजनीती और सुशाशन की राजनीती में फरक क्या होता है --->
१. चुनाव से पहले उध्दव ने सीटों के बटवारे को लेकर बहुत जिद्दोजहद की लेकिन अमित शाह ने उनकी एक भी नहीं सुनी ,...कारण सिर्फ यही था की मोदी लहर पर सवार होकर शिव सेना अपने जीते हुए सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती थी ताकि सरकार बनाने की स्थिति में अपनी मनमानी कर सके
२. शिवसेना से गठबंधन टूटनेके बाद बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और सिर्फ पंद्रह दिनों के अंदर अंदर मोदीजी और राजनाथ सिंह ने स्वयं  सर्वाधिक रैलियां की जिससे शिवसेनाको मिर्ची लग गयी क्यूंकि वो भी उसी लहर पर सवार थे
३. शिव सेना को मिर्ची तब और भी लगी जब बीजेपी ने शिव सेना के खिलाफ कुछ भी नहीं बोलने और बाला साहब ठाकरे के वजह से विरोध की राजनिति न करने का निर्णय किया...तब तो फिर सामना के जरिये मोदी के बाप तक को नहीं छोड़ा गया
४.चुनाव होने के बाद जब बीजेपी एक मात्र सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो शिवसेना सकते में पड़ गयी और फिर आत्मसम्मान की बात करने लगी
५. उद्धव जी का अहंकार यहाँ पर भी नहीं टूटा तो खुले आम भाजपा को समर्थन देने के लिए सौदेबाजी करने लगे, लेकिन जब इस पर भी बीजेपी नहीं राजी हुई तो फिर एनसीपी से समर्थन का आरोप भाजपा के सर मढने में तनिक देर भी नहीं लगायी ...
६. उद्धव को लगा बीजेपी पर महज दस सीटों के लिएद बाव बनाकर महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में  प्रमुख मंत्रिपद, जैसे रियल स्टेट , फाइनेंस इत्यादि पर कब्ज़ा कर लेंगे लेकिन बीजेपी ने सूझ बूझका परिचय देते हुए ऐसा नहीं किया और इस तरह से गठबंधन की राजनीती से भाजपा बच गयी साथ ही जनता के बीच भी अच्छा संदेश गया, और तो और बीजेपी के किसी भी नेता ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप सेएनसीपी का समर्थन लेने की बात नहीं कही
७ और अब जब ध्वनि मत से बीजेपी सरकार को विश्वासमत प्राप्त हो गया तो चुनाव के बाद से सोयी हुई कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा क्यूंकि उसने सोचा था की किसी भी हालत में शिव सेना बीजेपीको सरकार नहीं बनाने देगी....लेकिन हुआ उल्टा ....और शिव सेना भी इस बात से चिढगयी ....कोंग्रेसी तो इतना चिढ गए की स्पीकर की गाड़ी रोककर मारा पीटी भी कर बैठे और तीन साल तक के लिए ससपेंड भी हो गए
८. शिव सेना या कह ले की उध्दव ठाकरे इतना चिढ गए हैं की बैठक पर बैठक कर रहे हैं पर अफ़सोस..यह की अबछह महीने तक कुछ नहीं होसकता ...क्यूंकि संविधान के हिसाब से अब छह महीने के बाद ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है
९ . अब रही बात वोटिंग कराने की ....तो आप यह जान लें की यह सबको पता था की ध्वनि मत से बीजेपी की ही सरकार बनेगी लेकिन किसी ने भी पहले यह नहीं कहा की वोटिंग के बिना हम सरकार का समर्थन नहीं करेंगे????क्यों ???क्यूंकि चाहे कांग्रेस हो, शिव सेना हो , या फिर एनसीपी ही हो सब पार्टियों में मोदी के प्रशंशक भरे पड़े है ...तो ऐसे में पार्टियों का मतभेद खुल के सामने आ जाता ....लेकिन अब वही पार्टियां इस बात को लेकर चिल्ला रही हैं की वोटिंग नहींहुई ...वोटिंग नहीं हुई जबकि वो खुद ही अंदर से इसके पक्षमें नहीं थी
और सबसे मजेदार बात यह है की अब महाराष्ट्र से दावूद कनेक्शन ख़त्म हो गया है(जैसा की मेरे पिछले लेख में यह बात कही जा चुकी है ) जिसकी वजह से सबसे ज्यादा तकलीफ दावूद के रिश्तेदारों यानी कांग्रेस को हुईहै ....यह बात भी सही है देवेन्द्र फड़नवीस के पास अभी बहुत बड़ी चुनौतियाँ है लेकिन ये सारी चुनौतियाँ सुशाशन के साथ धीरे धीरे ख़त्म होजाएँगी और महाराष्ट्र कीजनता को १५ साल के कुशाशन से मुक्ति और उसका इन्साफ मिल ही जायेगा

शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

महाराष्ट्र चुनाव का पाकीस्तान कनेक्शन Connection of Maharashtra election2014with Pakistan ISI and dawood

यह तो हम सभी को मालूम हैकी दाऊद इब्राहिम कासकर कहाँ छुपा बैठा है, और यह भी सबको पता है उसके सारेकाले कारोबार कहाँ से चलते हैं और यह भी की पाकिस्तानऔर आईएसआई उसको बचाक्यों रहे हैं ....अगर आपको न पता हो तो आपकी जानकारीके लिए बता दूँ की दाऊद अभी तक पाकिस्तान के कराची शहर में मौजूद है और वह अपने सारे काले धंधे मुंबई, यानी महाराष्ट्र की भूमिसे चलाता है ..और पाकिस्तानी आईएसआई उसका सपोर्ट इसलिए करती है क्यूंकि वह पाकिस्तान में बैठा बैठा हमारे नेताओं भ्रष्ट अफसरों की काली कमाई को हवाला के जरिये स्विस बैंकोंमें भिजवाता है और साथ ही साथ पाकिस्तान के मनपसंद काम , भारत में आतंकवाद और दहशतगर्दी को बढ़ावा देताहै....और तो और दाऊद की कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा हो न हो पाकिस्तान की आर्मी के खर्चे में भी जाता ही होगा....और हमारे देश से कमाकर पाकिस्तानी आर्मी हमी पर गोला बारूद बरसाती है...क्यूंकि ये बात सर से ऊपर चली जाती है की पाकिस्तान जैसा गरीब देश  , भारत जैसेबड़े देश पर हमले पर हमले करे और वो भी बिलावजह...
तो आईये थोड़ा समझने की कोशिश करते हैं ..
महाराष्ट्र का चुनाव भारतीयजनता पार्टी के लिए बहुतमहत्व का इसलिए है क्यूंकि इसकी सहयोगी रही शिवसेना ने भी नरेंद्र मोदी विरोधी खेमा में जुड़ गयी है . आश्चर्य इसलिए भी होता है केवल मुख्यमंत्री पद के लिए भी उद्धव अपनी हार स्वीकार करने को तैयार हैं....क्यूंकियह सभी जानते हैं की अब भारतीय जनता पार्टी के सहयोग के बिना सरकार बनाना संभव नहीं है, तो फिर उद्धव ठाकरे ने ऐसा क्योंकिया ??? इसका जवाब तो वही जाने लेकिन मुझे जहाँ तक लगता है की उनकी भी पार्टी में बहुत सारे बाहुबलि हैं जो महाराष्ट्र की सत्ता पर नज़रें गड़ाए हुए हैं ,....क्यूंकि अपनाकाम करवाने के लिए दाऊद की जेब भरने के लिए पैसा सबको चाहिए .....साथ ही साथ दावूद के गुर्गे कहीं न कहीं शिव सेना में भी अपनी पैठ बनाये हुए हैं जिनके दबाव के वजह से उद्धव ठाकरे , राज ठाकरे को भी नरेंद्र मोदी के विरोध में बोल रहे हैं , क्यूंकि यह बात समझ से परे ही है की उद्धव ठाकरे ने २०१४ के लोकसभा चुनाव से  सीख न लेकर मोदी के विरोध में चुनाव लड़ने का फैसला क्युँ किया है ... इससे भी ज्यादा आश्चर्य तब होता है जब यही शिव सेना के तथाकथित नेता मोदी का ऐसा घोर विरोध कर रहे हैं जैसे की १५ साल से कुशाशन कर रही कांग्रेस और ऍनसीपी का कोई दोष ही नहो,,,,,,इन्हें जनता के बारे में बात नहीं करनी है केवल और केवल मोदी विरोध ....लेकिन ये शिव सेना वही गलती कर रही है जो "आप पार्टी" ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत पाने के बाद की थी ....और वो गलती थी मोदी का विरोध ...और इसलिए उसे लोकसभा में ऐसी मुंह की खानी पड़ी थी की अरविन्द केजरीवाल की बोलती बंद हो गयी थी ....क्यूंकि उसने भी लोगों से मोदी नाम पर भी वोटमांगे थे ....इसलिए मोदी का विरोध करके शिवसेना भी वही गलती दोहरा रही है....लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है की शिव सेना मोदी के विरोध में यह सब जानते हुए भी क्यों आई है???...क्या यह अहम का टकराव है या , मुख्यमंत्री पद की लड़ाई, या फिर और कुछ जिसमे दाउद का हाथ है... ..खैर जो भी हो अगर भारतीय जनतापार्टी पूर्ण बहुमत से महारष्ट्रमें आती है तो इसमे सबसे ज्यादा नुक्सान दावूद इब्राहिम कास्कर का होने वाला है और जाहिर सी बात इससे पाकिस्तान के मनसुबों को बहुत बड़ा नुक्सान होगा क्यूंकि तब उसके भारतमें आतंकवाद को बढ़ावा देनेकी बहुपंचवर्षीय योजना पर पानी फिर जाएगा .....और भारत-पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी कर पाकिस्तान अपनी इसी हताशा का परिचय दे रहा है......वो यह सोच रहा है किसी तरह से मोदी को उकसाकर युध्द हो जाय और उसी को चुनावी मुद्दा बनाकर दाऊद कीमदद मोदी विरोधी सरकार बन जाए .....और यह मैं इसलिए कह रहा हूँ ...की मोदी विरोधी सारी पार्टियां एक ही बात कहती हैं वो यह की पाकिस्तान के साथ युद्ध चल रहा है और प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार कर रहे हैं ...ये बात सबने कही है ,....फिर चाहे वो ऍनसीपी के नेता हो या फिर शरद पवार , उद्धवठाकरे , राज ठाकरे और या फिर कोई और...साफ है कीमोदी विरोधी खेमे के पास बसयही बात कहने को है....लेकिन फिर भी मोदी जी ने इसका माकूल जवाब दे दिया है की सीमा पर मोदी की जरूरत नहीं हमारे वीर जवानो की गोलियां ही काफी हैं.......साठ साल से कुशाशन देने वाली सरकारें कितनी बेशरम होकर मोदी जी से ६०दिनों के काम का हिसाब मांग रही हैं और साथ ही साथ पैसों वाली वोट बैंक राजनिति कर रही हैं , लेकिन इन्हे पता नहीं की मोदी जी ने जो ६० दिनों में कर दिखाया वो कांग्रेस से ६०सालों में भी संभव नहीं हुआ । मसलन बेकार के कानूनो को खत्म करना और जन धन योजना के तहत सभी गरीब पिछड़ों के जीवन बीमा सहित बैंक एकाउंट खुलवाना....हालाँकि अभी बहुत कुछ करना बाकी है
महाराष्ट्र के चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से आती है तो दावूद और उसका पाकिस्तानी कनेक्शन पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा और यही चीज़ पाकिस्तान के दुख का कारण है और इसी से वह यहाँ की राजनीतिक पार्टियों को सीमापर गोलीबारी करकर एक चुनावी मुद्दा देना चाहता है ताकि वोटों के बटने से महाराष्ट्र में स्थिर सरकार न बन पाये ....शिव सेना का अलग होना इसका मात्र एक उदाहरण है ...
ये तो रही मेरी बात ...हो सकता है यह गलत या सही हो लेकिन अब सही गलत का असली फैसला महाराष्ट्र जनता को करना होगा जिसे अपना भूत और भविष्यकाल दोनों को देखकर वर्तमान में एक ऐसी सरकार चुननी होगी जो केवल जनताकी भलाई की बात करे नाकी महाराष्ट्र को तोड़ने जोड़ने की और ना ही मुख्यमंत्री पद की....जो भी होगा वह भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई के लिएबहुत अहम है
जय हिन्द जय भारत




A secret report of Mausad in Israel says the quoted image

बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

अपना दिमाग ठंडा रखते हुए मुर्ख व्यक्तियों कि कैसे सहायता करें??? How to help fools and keep ourself calm and cool????

बचपन में प्रायः हम एक खेल खेला करते थे, रस्सी के एक छोर को बांध कर दूसरे छोर से तरंगे भेजते थे और जैसे ही तरंगे दूसरे बंधे हुए छोर से टकराती थी तो उसकी प्रतिक्रिया स्वरुप एक और तरंग पैदा होकर हम तक वापस आती थी. परन्तु बच्चों के इस खेल में एक ऐसा सन्देश छुपा हुआ है जो हमारे व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल सकता है और हमें एक सफल इंसान बना सकता है.
हम लोग कभी कभी ऐसी परिस्थिति के शिकार जरूर होते हैं जब हम सामने वाले की मूर्खता पूर्ण बातों का तर्क पूर्ण समाधान नहीं कर पाते है, ऐसे व्यक्ति एक मेढक के कुएं की भाँती उल जलूल तर्क दिया करते हैं और अपनी बातों का समर्थन करने के लिए कुतर्क किया करते हैं , और कभी कभी तो सीधे हमारे ऊपर व्यंग वाक्यों की बौछार सी कर देते हैं . और ऐसी परिस्थिति में हम भी अपना आपा खोकर उसी व्यक्ति के समान कुतर्क करने का प्रयास कर देते हैं और सफल होने पर मन ही मन झुँझला उठते हैं .
ऐसी परिस्थिति में हम उस व्यक्ति की मूर्खता को ही दोषी मानते हैं और हम भी उसी की तरह उलझकर रह जाते हैं और कोई कोई मूर्खता पूर्ण बात बोल देते हैं या कर बैठते हैं जिसे जानकर फिर हमें भारी पछतावा भी होता है. ध्यान से गौर करें या फिर अनुभव करे तो हम पाएंगे कि ऐसे व्यक्ति कि मूर्खता का दोष उतना नहीं होता जितना कि हम सोच बैठते हैं.
हमें ऐसे व्यक्तियों के सामने एक ऐसी दिवार बनानी होती है जो बुरी तरंगो को तो वापस भेज दे परन्तु अच्छी बातों वाली तरंगो को ग्रहण कर ले .इसको आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हमारी बुराई कर रहा हो तो ऐसे समय में हमें कोई प्रतिक्रिया देकर धैर्य बनाये रखना होता है और जब वो कोई सही बात कहे तो उसे स्वीकार भी करना होता है ,
अब ऐसा क्यों करना चाहिए ??? इस प्रश्न का उत्तर ढूढने के लिए मैं आपको उदहारण देता हूँ , जैसे कि मान लीजिये कोई व्यक्ति बीमार है, मरीज है , तो क्या आप उसके खाने पीने कि हर डिमांड पूरी करते हो क्या ?? नहीं ना ?? लेकिन साथ ही साथ उसकी उचित डिमांड को पूरी करते हो. ठीक उसी तरह से व्यर्थ बकवास और मूर्खतापूर्ण बात करने वाले बीमार मनुष्य होते हैं , तो हमारा क्या कर्त्तव्य बनता है ??? ऐसे लोगो को हमारी मदद चाहिए होती है ताकि वो विषय को अच्छी तरह से समझ सकें .इसलिए हमें उनकी बातों को ध्यान से सुनना तो चाहिए लेकिन उसमे गलत सही का निर्णय स्वयं करना चाहिए . ध्यान रहे हमें उनको उनकी गलतियां नहीं बतानी हैं बल्कि उनकी अच्छाइयां ही बतानी है ....क्यूंकि अगर हम उनकी गलतियां बताने लगे तो वे उल्टा और क्रोधित होकर और उत्तेजित हो जाएंगे और मामला बिगड़ जाएगा , गलतियां बताने के बजाय उनको इसका एहसास करवाना चाहिए, क्यूंकि मुर्ख व्यक्ति कुछ सुनना नहीं चाहता परन्तु जैसे ही उसे उसकी गलती का अनुभव होगा वो तुरंत सावधान होने का प्रयास करेगा,
अब एक प्रश्न खड़ा होता कि हम उसे उसकी गलती का एहसास कैसे कराएं ?? तो इसके लिए हमें कुछ करने कि जरुरत ही नहीं ,इसके लिए हमें बस एक मजबूत दिवार बनानी होती है बस ...ताकि जब बुरी तरंगे टकराएं तो वो उसी वेग से वापस चली जाएँ जहा से आई हैं .इस दृष्टान्त से यही समझ लेना चाहिए जब कोई व्यक्ति हमें लाख बुरा भला कह रहा हो और अगर हम उस पर कोई प्रतिक्रिया दे तो उस व्यक्ति द्वारा कही हुई वही बातें उसके अंतरमन को उसकी गलतियों  एहसास दिला ही देंगी ,
व्यक्ति को अपनी गलतियों का एहसास कब होता है जब उसका अहंकार टूटता है तब. इसीलिए अगर अहंकार कि मात्रा ज्यादा है तो हो सकता है उसे उसकी गलती का पता बहुत देर बाद हो , परन्तु अगर हमने अहंकार को पहचान लिया तो अपनी गलती समझने में देर नहीं लगती , इसीलिए अगर मूर्खता के साथ अहंकार भी ज्यादा हो तो ऐसे व्यक्तियों से कम से कम वार्तालाप करने में ही भलाई है 
परन्तु साथ ही साथ यह भी सच है हो सकता है कभी कभी हम ही किसी मुर्ख व्यक्ति कि तरह हरकतें कर बैठते हैं इसलिए सर्वप्रथम अपने अहंकार को तोड़कर अपनी गलतियों का अनुभव करके उन्हें स्वीकार करना चाहिए , और यहाँ स्वीकार करने का मतलब यह नहीं हम इसे हर किसी को बताते फिरें बल्कि इनको समझकर इनको दूर करने का प्रयास करें तथा जहाँ गलती हो वहां बिना किसी झिझक के स्वीकार कर ले , तभी हमारी पारमार्थिक , आध्यात्मिक और वैयक्तिक उन्नति संभव है
श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक सदा अनुकरणीय है
सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु
साधुष्वपि पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते
भावार्थ :  सुहृद् (स्वार्थ रहित सबका हित करने वाला), मित्र, वैरी, उदासीन (पक्षपातरहित), मध्यस्थ (दोनों ओर की भलाई चाहने वाला), द्वेष्य और बन्धुगणों में, धर्मात्माओं में और पापियों में भी समान भाव रखने वाला अत्यन्त श्रेष्ठ है॥9