मोदी ने एक साल में इतनी तेज़ी से बदलाव लाया है की विरोधियों को हर तरफ से तीखी वाली मिर्ची लग रही है ....एक तरफ केजरीवाल बोलता है की वो नजीब जंग के द्वारा बदला ले रहा है और अब राज बब्बर बोलता है की वे प्रधानमंत्री नहीं परिधानमंत्री हैं .....मैंने एक बारी तो सोचा छोडो क्या करना ऐसे लोगों का ...लेकिन फिर मन में ख्याल आया जार देखू तो इनकी बातों में कितना दम है .......पहले केजरीवाल को ले लेते हैं ...इनका आरोप है की मोदी दिल्ली की हार का बदला ले रहे हैं ...चलो मान लिया की मोदी दिल्ली की हार का बदल ले रहे हैं ....लेकिन ये तो बताओ मोदी राज में ही दिल्ली पुलिस इतने अच्छे से काम क्यों कर रही है ....इस बार बाइक वालों का हुड़दंग कितनी सफलता से रोक गया ....वरना वही शीला दीक्षित की सरकार के समय दिल्ली पोलिस असहाय नज़र आती थी ....और तो और केंद्र सरकार द्वारा बिजली उत्पादन बढ़ाये जाने का क्रेडिट आप को लेते हुए शर्म भी नहीं आती बेशरम केजरीवाल ......केजरीवाल को लगता है की अगले चुनाव २०१९ में उनकी पार्टी ४०० सीट जीतकर पार्लियामेंट आएगी और फिर पुरे देश पर शाशन कर लेगी ....लेकिन मेरे प्यारे केजरीवाल दिल्ली की जनता को बेवकूफ तो बना लिया लेकिन देश की जनता उससे भी ज्यादा समझदार है ....वो यह समझती है की उसका हित अनहित क्या है ....भाजपा के १५ साल गुजरात में , छत्तीसगढ़ में १० साल , मध्य प्रदेश में १५ साल में सुशाशन देकर नाम कमाया है ....लेकिन आपका कोई ट्रैक रिकॉर्ड तो है नहीं ...तो इसलिए बयानबाज़ी से बेहतर है काम करिये ...क्यूंकि पांच साल के बाद जनता आपकी नौटंकी नहीं देखेगी बल्कि आपको आपके काम के हिसाब से नंबर मिलेंगे
और राज बब्बर साहब से भी मैं यही कहना चाहूंगा की मोदी जी की नक़ल करना बंद करे ....आज के समय में जब आप के पास देश हित से जुड़ने के लिए सामान्य ज्ञान का आभाव है उसीके वजह से आप जैसे नेता ऐसी बयां बाज़ी करते हैं ....मुझे आजतक यह नहीं समझ आया की जब मोदी जी यह बोल चुके हैं की किसानो की हित से जुडी हुई कोई भी बात को सशोधन करने में BJP सरकार पीछे नहीं हटेगी तो फिर आपको भूमि अधिग्रहण कानून से इतनी समस्या क्यों है .....आपको केवल राजनीति नहीं करनी चाहिए ....राष्ट्रनीति भी अपनानी चाहिए ......जो राजनीती राष्ट्र हित से अलग हो वह राजनीति नहीं हैं बल्कि वह देश द्रोह नीति है जिससे ना तो जनता का भला होगा और न ही आपका .....लेकिन कांग्रेस समान भैंस के सामने बीन बजने से कोई फायदा नहीं क्यूंकि जो लोग सत्ता को नहीं पचा पाये वो आज की तारिख में हार को भी पचा नहीं पा रहे हैं ...और जिनके पास सत्ता आ गयी (केजरीवाल) वो यह नहीं समझ पा रहे हैं विरोध की राजनीती से आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते .....झूठ बोलकर , फरेब करके आप सत्ता के सिखर पर तो पहुँच सकते हैं ....लेकिन अंत में जब यह सब जनता के सामने आता है और जनता शक्तिमान बनती है तो फिर आपका भी हाल गद्दाफी और होस्नी मुबारक जैसा होना तय है ....
अंततः मैं यह भी कहना चाहूंगा की भारत की जनता काफी समझदार और बुध्दिमान है जो कानून को अपने हाथ में लेना उचित नहीं समझती है ....नहीं तो सोचिये जरा अगर अन्ना आंदोलन के दौरान जनता उग्र हो कर संसद पर हमला कर देती ....या फिर बाबा रामदेव के 2014 आंदोलन के दौरान पंद्रह अगस्त के कार्यक्रम को नहीं होने देती ....लेकिन ऐसा सब नहीं हुआ क्यूंकि भारत की जनता की आशा आकांक्षाएं सब भारत के संविधान में सन्निहित हैं और जनता देखकर प्रयोग कर समझना चाहती है अब मेरा भला कैसे होगा ....और अगले दस सालों तक जनता यह प्रयोग करती रहेगी ...जैसे की हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड और दिल्ली के चुनावों में हुआ यह सब जनता के प्रयोग हैं ...और जब जनता यह सुनिश्चित कर लेगी तो फिर सब देश द्रोहियो के चहरे से नकाब उठ जायेगा ....
हमें तो बस यही शेर याद आता है ...
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है
वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है ....
jay hind
jay bharat
और राज बब्बर साहब से भी मैं यही कहना चाहूंगा की मोदी जी की नक़ल करना बंद करे ....आज के समय में जब आप के पास देश हित से जुड़ने के लिए सामान्य ज्ञान का आभाव है उसीके वजह से आप जैसे नेता ऐसी बयां बाज़ी करते हैं ....मुझे आजतक यह नहीं समझ आया की जब मोदी जी यह बोल चुके हैं की किसानो की हित से जुडी हुई कोई भी बात को सशोधन करने में BJP सरकार पीछे नहीं हटेगी तो फिर आपको भूमि अधिग्रहण कानून से इतनी समस्या क्यों है .....आपको केवल राजनीति नहीं करनी चाहिए ....राष्ट्रनीति भी अपनानी चाहिए ......जो राजनीती राष्ट्र हित से अलग हो वह राजनीति नहीं हैं बल्कि वह देश द्रोह नीति है जिससे ना तो जनता का भला होगा और न ही आपका .....लेकिन कांग्रेस समान भैंस के सामने बीन बजने से कोई फायदा नहीं क्यूंकि जो लोग सत्ता को नहीं पचा पाये वो आज की तारिख में हार को भी पचा नहीं पा रहे हैं ...और जिनके पास सत्ता आ गयी (केजरीवाल) वो यह नहीं समझ पा रहे हैं विरोध की राजनीती से आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते .....झूठ बोलकर , फरेब करके आप सत्ता के सिखर पर तो पहुँच सकते हैं ....लेकिन अंत में जब यह सब जनता के सामने आता है और जनता शक्तिमान बनती है तो फिर आपका भी हाल गद्दाफी और होस्नी मुबारक जैसा होना तय है ....
अंततः मैं यह भी कहना चाहूंगा की भारत की जनता काफी समझदार और बुध्दिमान है जो कानून को अपने हाथ में लेना उचित नहीं समझती है ....नहीं तो सोचिये जरा अगर अन्ना आंदोलन के दौरान जनता उग्र हो कर संसद पर हमला कर देती ....या फिर बाबा रामदेव के 2014 आंदोलन के दौरान पंद्रह अगस्त के कार्यक्रम को नहीं होने देती ....लेकिन ऐसा सब नहीं हुआ क्यूंकि भारत की जनता की आशा आकांक्षाएं सब भारत के संविधान में सन्निहित हैं और जनता देखकर प्रयोग कर समझना चाहती है अब मेरा भला कैसे होगा ....और अगले दस सालों तक जनता यह प्रयोग करती रहेगी ...जैसे की हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड और दिल्ली के चुनावों में हुआ यह सब जनता के प्रयोग हैं ...और जब जनता यह सुनिश्चित कर लेगी तो फिर सब देश द्रोहियो के चहरे से नकाब उठ जायेगा ....
हमें तो बस यही शेर याद आता है ...
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है
वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है ....
jay hind
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